मेरी कलम से
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चुनावी मौसम और विद्यालयो को सम्मिलित करके मेरे द्वारा लिखी गयी एक व्यंग्यात्मक कविता।।
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चुनावी मौसम और विद्यालयो को सम्मिलित करके मेरे द्वारा लिखी गयी एक व्यंग्यात्मक कविता।।
मित्रो जिस तरह से उत्तर प्रदेश अब चुनावी मौसम में रंग चुका है हर तरफ सिर्फ और सिर्फ चुनावी बादल छाए है,उसी परिप्रेक्ष्य में मैने एक व्यंगात्मक कविता के माध्यम से पूरे प्रदेश की स्थिति को एक अध्यापक की नजर से बयाँ करने की एक कोशिश की है।।
शीर्षक
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शीर्षक
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फिर से चुनाव आ गए
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बजने लगी रणभेरिया जोर से,
लड़ने के नए सामान आ गए।
लड़ने के नए सामान आ गए।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
लड़े थे जो मंदिर मस्जिद के नाम पर,
कर आये बंद बो दुकान आ गए।
मस्जिदों में आरती पढ़ने लगें बो,
मंदिरों में देखों अजान गा गये।
कर आये बंद बो दुकान आ गए।
मस्जिदों में आरती पढ़ने लगें बो,
मंदिरों में देखों अजान गा गये।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
बनने लगी रोज नयी नीतियां,
बेरोजगार अब ध्यान आ गए।
मुफलिसी में कटी जिनकी जिंदगी,
इन्तजार में शमशान आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
बनने लगी रोज नयी नीतियां,
बेरोजगार अब ध्यान आ गए।
मुफलिसी में कटी जिनकी जिंदगी,
इन्तजार में शमशान आ गए।।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
करते थे गलबहियां कल तक ,
हाथ में उनके गिरेबान आ गए।
उगले थे जो चाशनी दिन रात भर,
अधरों पे उनके जहर के बाण आ गए।।
हाथ में उनके गिरेबान आ गए।
उगले थे जो चाशनी दिन रात भर,
अधरों पे उनके जहर के बाण आ गए।।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
कालिख पौंछ पौंछ कर सभी,
खूद ही खुद का गुणगान गा गये।
छोड़ छोड़ के बांबियां सभी,
खद्दर में विषैले सांप आ गए।।
खूद ही खुद का गुणगान गा गये।
छोड़ छोड़ के बांबियां सभी,
खद्दर में विषैले सांप आ गए।।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
खुलने लगे रोज नए टेण्डर,
हर मोड़ पे भगवान आ गए।
उधड़ रही है नित फाइले नयी,
घोटालो के मस्त पकवान आ गए।।
हर मोड़ पे भगवान आ गए।
उधड़ रही है नित फाइले नयी,
घोटालो के मस्त पकवान आ गए।।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
मौलवी बने गये है नेता सभी,
लंगोट में बाबा दमदार छा गए।
बैच बेच धर्म हर मोड पर,
नये भेष में नए शैतान आ गए।।
लंगोट में बाबा दमदार छा गए।
बैच बेच धर्म हर मोड पर,
नये भेष में नए शैतान आ गए।।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
चल रहा था विद्यालय बड़े शौक से,
निरिक्षणो के तूफान आ गए।।
बच्चे ढूढ रहे मास्साब को अब,
बी एल ओ के नए फरमान आ गए।।
निरिक्षणो के तूफान आ गए।।
बच्चे ढूढ रहे मास्साब को अब,
बी एल ओ के नए फरमान आ गए।।
देख लो जरा ध्यान से,
फिर से चुनाव आ गए।।
फिर से चुनाव आ गए।।
जलने लगी बत्तियां फिर स्कूल की,
डालने को केबल मेहरबान आ गए।
मर चुकी थी आत्मा जिन नलों की,
डालने में बो उसमे जान आ गए।।
डालने को केबल मेहरबान आ गए।
मर चुकी थी आत्मा जिन नलों की,
डालने में बो उसमे जान आ गए।।
बच्चों ने भी झूम झूम के बोला,
सर जी अब चुनाव आ गए।।
सर जी अब चुनाव आ गए।।
आलोक कुमार सहायक अध्यापक।
बेसिक शिक्षा परिषद।
उत्तर प्रदेश।
बेसिक शिक्षा परिषद।
उत्तर प्रदेश।

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