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मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

अहंकार - एक लघु कथा(मेरी कलम से)


अहंकार - एक लघु कथा।
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एक बार केले और बरगद के पेड़ में किसी बात पर बहस हो गयी।
केले का पेड़ बोला," क्या फायदा तुम्हारा? तुम तो किसी काम के नही हो।तुम पर तो कोई फल भी नही लगता है।बस आकार में ही भले बड़े बने रहो।और तो और देखो तुम जितना ऊपर बढ़ते हो,तुम्हारी जटाएं उतनी ही नीचें की तरफ बढ़ती है।

मुझे देखो मै कितने मीठे मीठे फल देता हूँ।तुम्हारा मेरा क्या मुकाबला।तुम तो मुझसे तुलना के लायक भी नही हो।""

बरगद बड़े ही गंभीर स्वर में बोला," शायद इसी अहंकार की वजह से तुम्हारा सिर हर बार काट दिया जाता है।""

आलोक कुमार सहायक अध्यापक
बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश।


काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच।
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच।।
भावार्थ:--
चाहे कोई कितने ही उपाय कर ले पर केला तो काटने पर ही फलता है । नीच विनय से नहीं मानता वह डांटने पर ही रास्ते पर आता है।

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